"सोन चिड़िया" और डाकू फिल्म शृंखला / जयप्रकाश चौकसे

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"सोन चिड़िया" और डाकू फिल्म शृंखला
प्रकाशन तिथि : 04 मार्च 2019


सिनेमाघरों में इंद्र कुमार की 'टोटल धमाल’ के बाद 'लुका छुपी’ और अभिषेक चौबे की 'सोन चिड़िया’ दिखाई जा रही है। बहुत अरसे के बाद आई डकैत केंद्रित 'सोन चिड़िया’ में सुशांत राजपूत और भूमि पेडनेकर के अभिनय की प्रशंसा की जा रही है। भूमि पेडनेकर अभिनीत फिल्मों की सफलता का प्रतिशत दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा और अनुष्का शर्मा से अधिक है परंतु उसका मेहनताना और सितारा हैसियत औसत ही है, क्योंकि फिल्म बाजार की कुप्रथाएं अन्य क्षेत्रों में व्याप्त कुप्रथाओं की तरह ही बड़ी मजबूत हैं। इसी फिल्म के नायक सुशांत राजपूत ने भी 'पीके’ जैसी फिल्म के साथ अन्य सफल फिल्मों में भी अभिनय किया है परंतु फिल्म बाजार ने उनके साथ भी न्याय नहीं किया। भूमि पेडनेकर ने आदित्य चोपड़ा की फिल्म "जोर लगा कर हईशा’ के लिए अपना वजन बढ़ाया था। "टॉयलेट एक प्रेम कथा’ के लिए वजन घटाकर वे अपने औसत वजन पर लौटी थीं। सभी कलाकार भूमिकाओं के लिए अपना वजन घटाते-बढ़ाते रहते हैं। आमिर खान ने 'गजनी’ के लिए मांस पेशियों को सशक्त किया था और 'दंगल’ के लिए मोटापा अर्जित किया था। पहलवान के बुढ़ापे में उसकी भूख तो कायम रहती है परंतु वह पहले की तरह कसरत नहीं कर पाता जिस कारण वह चलता-फिरता सजीव भूगोल ही लगता है। कलाकार अपने शरीर की बांसुरी में अतिरिक्त छिद्र बनाता है परंतु किसी दिन बांसुरी ही उसका विरोध करने लगती है। व्यवस्थाएं भी बांसुरी की तरह ही होती है। सकारण तर्क आधारित विरोध के मध्यम स्वर प्रायोजित तालियों के कोलाहल में सुनाई नहीं पड़ते। बहरहाल, अभिषेक चौबे ने अपनी फिल्म की शूटिंग चंबल में की परंतु यह चंबल में शूटिंग की जाने वाली पहली फिल्म नहीं है। सुनील दत्त भी अपनी डाकू केंद्रित 'मुझे जीने दो’ की कुछ शूटिंग चंबल में कर चुके थे। राहुल रवैल ने डकैत की कुछ शूटिंग चंबल में की थी।

डाकू दल भी जाति प्रथा को कायम रखते हैं। प्राय: एक दल में एक ही जाति के सदस्य हुए हैं। कभी-कभी किसी दल में अन्य जाति के सदस्य को भी उसकी किसी विशेष योग्यता के आधार पर शामिल किया जाता है। भारतीय समाज में जाति प्रथा कितनी गहराई तक जमी हुई है। इसका एक उदाहरण जेपी दत्ता की फिल्म के एक दृश्य में इस तरह प्रस्तुत हुआ कि पुलिस अफसर चार डाकुओं को गिरफ्तार करके अपनी जीप में मुख्यालय की ओर ले जा रहा है। एक निर्जन स्थान पर वह अपने सजातीय डाकू को भाग जाने का आदेश देता है। उसके भाग जाने पर अंतिम डाकू को गोली मार देता है ताकि उसके भेद भाव का कोई गवाह जीवित नहीं रहे। सबूत बनाना और सबूत मिटाना हमेशा ही व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली का हिस्सा रहा है।

चंबल का अधिकांश भाग मध्य प्रदेश में है परंतु कुछ हिस्से राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी आते हैं। कोई भू-भाग डाकू को जन्म नहीं देता। डाकू असमानता और अन्याय आधारित व्यवस्थाओं की कोख से जन्म लेते हैं। यह अजीबोगरीब इत्तेफाक है कि चंबल की तरह यूरोप के सिसली में जन्मे कुछ लोगों ने अमेरिका में संगठित अपराध को जन्म दिया। संगठित अपराध का अपना अलिखित संविधान है। वे स्वयं को 'परिवार’ मानते हैं और कभी दो परिवारों के बीच संघर्ष होता है। गैंगवार में कुछ अपराधी संगठन के लोग भी मारे जाते हैं।

संगठित अपराध का मुखिया गॉडफादर का अपना समानांतर दरबार भी लगता है। जहां आवाम से कुछ फरियादी आते हैं। फरियादी को कानून-व्यवस्था से न्याय नहीं मिला इसलिए वह गॉडफादर के दरबार में आता है। मारिया पूजो के उपन्यास 'गॉडफादर’ में अपराध जगत के कार्यकलाप और परंपराओं इत्यादि का विशद विवरण प्रस्तुत किया गया। उपन्यास प्रेरित फिल्म भी हॉलीवुड इतिहास की सफलतम फिल्मों में से एक मानी जाती है। मार्लन ब्रैंडो ने गॉडफादर की भूमिका के लिए खूब तैयारी की थी। यहां तक कि उन्होंने अपने कुछ दांत भी निकलवाए थे कि डेंचर धारण कर सकें। माथे पर शल्य क्रिया द्वारा एक गांठ भी लगाई गई थी। सिसली में जन्मे लोग अमेरिकन भाषा के शब्दों को अलग सा उच्चारण करते हैं। इस तफल्लुज की खातिर मार्लन ब्रैंडो ने जानलेवा परिश्रम किया। 'गॉडफादर’ धन बरसाने वाला ब्रैंड बन गया और इसके अगले भाग भी बनाए गए। अंतिम कड़ी में गॉडफादर का पुत्र उनका उत्तराधिकारी है और उसने प्रेम विवाह किया है। 'गॉडफादर’ की बहू अपराध परंपरा का अंत करना चाहती है। वह अपना विरोध इस तरह से अभिव्यक्त करती है कि वह गर्भपात करा लेती है। अपने पति से कहती है कि वह नहीं चाहती कि उसका बेटा भी अपराधी बने और उसे एकमात्र रास्ता यही दिखा कि अजन्में का गर्भपात करा ले। इस कार्य को क्रूरता कहेंगे या ममता की सबसे विरल पायदान?