अपवित्र साधन से कलुषित साध्य / जयप्रकाश चौकसे

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अपवित्र साधन से कलुषित साध्य
प्रकाशन तिथि :31 अक्तूबर 2017


रोहित शेट्‌टी की 'गोलमाल' आय के कीर्तिमान बना रही है। 'बाहुबली' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है। आमिर खान की 'सीक्रेट सुपरस्टार' ने मुनाफा अवश्य कमाया है परंतु समकालीन सफल फिल्मों से बहुत पीछे है। बॉक्स ऑफिस के इन आंकड़ों से भयावह तथ्य यह उभरता है कि इस समय तर्कहीनता का उत्सव मनाया जा रहा है और राजनीति में भी शिखर पर पहुंचे लोग तर्कहीन होते हुए इस ज़िद पर अड़े हैं कि उनके गलत फैसले सही हैं। 'बाहुबली' से तिलमिलाए फिल्मकार शंकर और रजनीकांत अपनी फिल्म '2.0' में अकल्पित धन लगा रहे हैं और दुनिया के सबसे ऊंचे मंच पर अपना संगीत जारी करने के समारोह पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुके हैं। यश चोपड़ा का प्रचार विभाग दावा कर रहा है कि उनकी 'टायगर जिंदा है' के नायक सलमान खान ने तीस किलो वजन की मशीनगन हाथ में लेकर शूटिंग की है। ये सारी बातें केवल एक ही विचार को रेखांकित कर रही हैं कि तर्कहीनता व अतिरेक को गुणवत्ता पर तरजीह दी जा रही है। गुजरात के चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री बार-बार गुजरात जा रहे हैं। ये सब बातें संकेत दे रही हैं कि गुणवत्ता को हाशिये में ढाल दिया गया है और साध्य से निगाह हटाकर साधन पर जोर दिया जा रहा है। एक मुख्यमंत्री अपने प्रांत की सड़कों में पड़े गड्‌ढों को अपने बयान से पाटने का प्रयास कर रहा है। मुंबई से इंदौर आते समय बस मैं बैठा मुसाफिर आराम से सफर तय करता है और जब बस गड्‌ढों पर दचके खाती है, वह समझ जाता है कि अब बस मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश कर चुकी है। आज एक झूठ को हजार बार बोलकर सच का भ्रम रचा जा रहा है।

इस तर्कहीनता के उत्सव व झूठे बयानों के दौर का मजा अवाम उठा रहा है, क्योंकि तर्कप्रधान दौर में उसे न्याय नहीं मिला। अब उसके पास खोने को कुछ नहीं है, सो वह अभावों के दौर का अभ्यस्त होता जा रहा है। उसके इस लचीलेपन ने ही उसे सदियों के असमान युद्ध में अपराजेय बनाए रखा है। वह बार-बार दोहराता है कि 'देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।' उसकी इस उदासीनता व प्रतिरोध नहीं करने को हुक्मरान अपनी सफलता मान रहा है।

गोलमाल में हास्य के साथ भूत-प्रेत व पुनर्जन्म की बेमेल खिचड़ी है। मेहमूद की 'भूत बंगला' और विद्या बालन अभिनीत 'भूलभुलैया' भी भूत-प्रेत कथाएं थीं और सफल भी रही थीं। रामसे ब्रदर्स ने ताउम्र भूत-प्रेत की फिल्में बनाई हैं और अब वे अपने पारिवारिक मसाले में हास्य जोड़कर सक्रिय होना चाहेंगे। रामगोपाल वर्मा ने भी भूत-प्रेत की फिल्में बनाई थीं। अत: वे भी अपनी बंद दुकान के पट खोलकर सक्रिय होने का प्रयास करेंगे। उन सारी बातों को पुन: जगाया जा रहा है, जिससे मुक्त होने में हमें लंबा वक्त लगा था। आप इस प्रवृत्ति को देखें कि अनेक नए त्योहार मनाए जा रहे हैं, जाने कब से उनींदी देवियों को जगाया जा रहा है। आए दिन सड़कों पर अजीबोगरीब धर्म यात्राएं देखी जा सकती हैं। अवाम को लगता है कि धर्म के नाम पर सत्ता पाई जा सकती है तो उन्हें भी कुछ तो मिल ही जाएगा। प्रतिभा और परिश्रम के मार्ग को अवरुद्ध किया जा रहा है। टोना टोटका लौट रहा है। भारतीय कथा फिल्मों के इतिहास में हर दौर में तर्कहीनता से प्रेरित फिल्में बनी हैं। स्टन्ट फिल्मों के दर्शक हमेशा रहे हैं। 'गुलबकावली,' 'अलादीन का चिराग' और 'हातिमताई' प्राय: बार-बार बनाई गई है परंतु उनमें बालकनी खाली रहती थी और नीचे का हाल ठसाठस भरा रहता था। तथाकथित अाक्रोश के दौर में नीचे की श्रेणी के दर्शक घर बैठ गए। आज तर्कहीनता का उत्सव मनाती फिल्मों में श्रेष्ठ वर्ग आनंद लेने लगा है और अनचाहे ही दर्शक वर्ग में समाजवाद आ गया है। बच्चों के लिए बनाई फिल्में बुजुर्ग देख रहे हैं और बच्चे वयस्कों के लिए बनी एडल्ट फिल्में देख रहे हैं। यह पागलपन का दौर है और इस प्रचार के साथ इसे बेचा जा रहा है कि पागल सुखी प्राणी होता है, उसे कोई दुख नहीं होता। सुख के नाम पर मूर्खता को एकमात्र रास्ता बताया जा रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में हिंसा की एक घटना से अंग्रेज हुक्मरान हिल गए थे परंतु गांधीजी ने हिंसा की निंदा की। उनके लिए साधन की पवित्रता शीघ्र मंजिल पाने से अधिक महत्वपूर्ण थी परंतु गांधीजी के आदर्श उनके जीवनकाल में ही ध्वस्त होने लग थे। आज गांधीजी की तस्वीर करेंसी नोट पर प्रकाशित होती है परंतु उसका भी अवमूल्यन हो गया है। 'बाहुबली' के आणविक विस्फोट का विकिरण प्रभाव कुछ सीरियलों पर देखा जा सकता है। गोलमाल के भूत-प्रेत 'अदालत' नामक कार्यक्रम में प्रवेश कर चुके हैं और भूत को गवाह के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। फ्लू और चिकगुनिया से अधिक तीव्रता से तर्कहीनता फैल रही है। जादू टोना विज्ञान को सिंहासन से निष्कासित कर रहा है। गुलजार की पागलखाने पर केंद्रित फिल्म के गीत के बोल थे, 'जिन से भागे भूत-प्रेत और रम से भागे गम।' कोई आश्चर्य नहीं कि शराब खूब बिक रही है।