बदलती जा रही है सेल्यूलाइड की तस्वीर / जयप्रकाश चौकसे

Gadya Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
बदलती जा रही है सेल्यूलाइड की तस्वीर
प्रकाशन तिथि : 10 फरवरी 2022


मनोरंजन जगत में टेक्नोलॉजी ने नई क्रांति ला दी है। गोया की ओ.टी.टी मंच के आने के बाद फिल्म निर्माण के विषयों में विविधता आई है और फिल्मों के प्रस्तुतिकरण में विविध प्रकार के प्रयोग हो रहे हैं। एक तरफ तो आधुनिकता की ओर झुकाव है और दूसरी तरफ नाग-नागिन की बेसिर पैर की कहानियां भी पसंद की जा रही हैं। विज्ञान लगातार बीमारियों पर विजय पा रहा है तो जादू-टोने, टोटके भी कम नहीं हैं। घर में काम-काज करने वाली महिलाओं के जीवन में ऐसा बहुत कुछ रोमांचक है, जिसे ओ.टी.टी के माध्यम से दिखाया जा रहा है। यह नए पात्रों का साधारणीकरण माना जा सकता है।

सेल्यूलाइड पर फिल्म बनाना महंगा था। फोटोग्राफी की शिक्षा लेना आवश्यक रहा है। अब तो मोबाइल पर भी फिल्म बनाई जा सकती है। फिल्म विधा का हव्वा अब लगभग समाप्त हो रहा है। आम आदमी भी अपनी कथा अपने परिचितों को कलाकार के रूप में लेकर बना सकता है। यह भी संभव है कि इन रचनाओं में से श्रेष्ठ रचना को दूसरी बार आधुनिक उपकरणों के साथ और भी बेहतर ढंग से बनाया जा सकता है।

घटना विहीन साधारण से दिखने वाले जीवन में बहुत सी रोमांचक बातें होती हैं। बात नजरिए की है। एक साधरण से दिखने वाले पत्थर को इस तरह भी शूट किया जा सकता है कि दर्शक उसमें कोई नए नाटकीयता के तत्व खोज सकें।

कुछ फिल्मकार लोकेशन मिलते ही उसके गिर्द कथानक का ढांचा बनाने लगते हैं। लोकप्रिय उपन्यासों पर अनेक फिल्में बनी हैं परंतु उन्हीं कथाओं पर नए दृष्टिकोण से रोचक फिल्में बनाई जा सकती हैं। ‘देवदास’ पर अनेक भाषाओं में फिल्में बनी हैं परंतु आज भी लेखक शरत बाबू के मूल पाठ की तरह ‘देवदास’ 18 वर्ष का और पारो 16 साल की तथा चंद्रमुखी 24 साल की प्रस्तुत नहीं की गई है।

हर पात्र के मनोविज्ञान की स्याह गुफा में बहुत से राज मौजूद हैं। रणबीर कपूर और रणवीर सिंह को कई पात्रों के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। आयुष्मान, राजकुमार राव और विकी कौशल जैसे युवा प्रतिभावान कलाकारों को अभी तक भरपूर अवसर नहीं मिले हैं। खबर है कि राजकुमार हिरानी शाहरुख खान अभिनीत फिल्म निर्देशित करने जा रहे हैं। भूमि पेडनेकर और तापसी पन्नू ने बहुत विविध भूमिकाएं अभिनीत की हैं। वे दोनों ‘सांड की आंख’ में उम्र दराज पात्र अभिनीत कर चुकी हैं। तापसी पन्नू एक धावक की भूमिका अभिनीत करने के लिए भी जी तोड़ मेहनत कर चुकी हैं। सलमान ‘बजरंगी’ नाम से फिल्म बनाने जा रहे हैं। गौरतलब है कि यह कथा उन्होंने 20 वर्ष पूर्व लिखी थी। ‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म से इस फिल्म का कुछ लेना देना नहीं है। यह फिल्म मानवीय रिश्तो के नए समीकरण प्रस्तुत करेगी।

समाज की कुरीतियों और अंधविश्वास पर भी फिल्में बन रही हैं परंतु उनमें से अधिकांश फिल्में इन कुरीतियों को ही अपरोक्ष रूप से बढ़ावा दे रही हैं। ज्ञातव्य है कि ओ.टी.टी मंच पर सेंसर लाने के प्रयास चल रहे हैं परंतु यह प्रयोग सफल होने की संभावना क्षीण है क्योंकि किसी चैनल का मालिक दक्षिण अफ्रीका में रहता है। डेनमार्क में अश्लील फिल्मों पर कोई बंदिश नहीं है परंतु वहां का नागरिक इनमें कोई रुचि नहीं लेता। यह उनके पर्यटन उद्योग का हिस्सा मात्र है।

सिने विधा का आम आदमी की पहुंच में आना और सिने उपकरण निर्माण से मनोरंजन उद्योग बहुत तेजी से बदल रहा है। परिवर्तन की लहरें प्राय: लाभ देती हैं। कुछ कमजोर चीजें टूट जाती हैं। कभी-कभी ये कमजोर टूटी हुई चीजें जाने कैसे एक-दूसरे से मिल जाती हैं और एक नया स्वरूप सामने आता है। किसी दौर में रद्दी कागज को पानी में डुबोकर कुछ दिन रखते फिर इसी लुगदी से बच्चों के लिए मां द्वारा खिलौने बनाए जाते थे। लेकिन वाकई अब मनोरंजन जगत बदल गया है।