भुने हुए मनोरंजन का अभद्र प्रदर्शन / जयप्रकाश चौकसे

Gadya Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
भुने हुए मनोरंजन का अभद्र प्रदर्शन
प्रकाशन तिथि :12 फरवरी 2015


कुछ दिन पूर्व मुंबई में 4 से 8 हजार रुपए प्रति टिकिट के हिसाब से 4000 लोगों ने यह मनोरंजक कार्यक्रम देखा जिसे आयोजक 'साहसी हास्य' कार्यक्रम कह रहे हैं तो पूरा देश 'अभद्र एवं अश्लील कार्यक्रम' मान रहा है। यह यूट्यूब इत्यादि वैकल्पिक माध्यमों पर जारी हुआ और प्रतिरोध के बाद हटाया गया। बुधवार को आमिर खान ने कार्यक्रम की घोर निंदा की और करण जौहर, अर्जुन कपूर, रणवीर सिंह को फटकारा। कुछ लोगों का ख्याल है कि अमेरिका में प्रचलित 'रोस्ट' नामक कार्यक्रम की इस नकल के प्रमुख आयोजक करण जौहर थे। यह भी ज्ञात हुआ है कि वृतचित्र निर्माता अशोक पंडित की शिकायत पर पुलिस में तीनों के नाम अश्लीलता के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रकरण कायम किया है।

करण, रणवीर, अर्जुन ने मंच पर कार्यक्रम दिया और दर्शकों में दीपिका पादुकोण, सोनाक्षी सिन्हा, आलिया भट्ट और करण जौहर की मां हीरू की मौजूदगी भी बताई जा रही है। दर्शक दीर्घा में पेज तीन पर प्राय: प्रकाशित लोकप्रिय व्यक्तियों के साथ अनेक धनाड्य व्यक्ति भी मौजूद थे। कार्यक्रम देने वालों से अधिक हैरानी चार हजार दर्शकों पर है जिन्होंने इतने मंहगे टिकिट खरीदे और पूरे कार्यक्रम में उनके ठहाके तथा तालियां बजाना बहुत ही बड़ा झटका है। अामिर ने इस अभद्र हास्य को हिंसा कहा है। 'रोस्ट' का शाब्दिक अर्थ भुना हुआ होता है और प्राय: यह मांस पकाने की विधा माना जाता है। आदिम युग में जानवर को लोहे की छड़ से लटका कर नीचे आग जलाई जाती थी। अब रोस्ट करने के विविध तरीके चुके हैं। रोजमर्रा की भाषा में उबाने के लिए कहते हैं कि इतना मत 'तलो' या 'भूनो'?

करण को उजागर होने का शौक है। वे अपनी सभी कमतरियों के साथ खूब देखे जाते हैं। बचपन से डरे-डरे, खामोश से करण सफल फिल्में बनाते ही खूब उजागर हो रहे हैं। उनकी कुछ फिल्मों में कम से कम एक पात्र समलैंगिक होता है। इसकी हद तो यह थी कि उनकी 'स्टूडेंट ऑफ ईयर' में प्राचार्य को समलैंगिक बनाया गया, वह पात्र मृत्यु के क्षण में अपनी दबी 'इच्छाएं' अभिव्यक्त करता है।

आम आदमी के मन में भांति-भांति के विचार उठते हैं, क्रोध भी उभरता है, कुछ फंतासी भी पनपती है और कुंठाएं भी उपजती हैं परन्तु कुछ ऐसी भी बातों का जन्म होता है जिन्हें वह अपने-आप से भी छुपाना चाहता है। कुछ अच्छी और मन-भावन बातों को वह माला के मनकों की तरह बार-बार घुमाता है परन्तु छुपाने वाली बातों को एक बार भी दोहराता नहीं है। ऐसी ही गुप्त बातें उस कार्यक्रम में सरेआम मंच पर प्रस्तुत की गई और दर्शकों ने ठहाके लगाए। मनुष्य अवचेतन की कंदरा के किसी कोने में हिंसात्मक, अश्लीलता और आदिम प्रवृत्तियां प्राय: कुलबुलाती हैं गाेयाकि अवचेतन के जामेजम में सैकड़ों शताब्दियां जीवित रहती हैं। जामेजम उस पात्र और प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें जिप्सी लोग भूत, वर्तमान और भविष्य देखते हैं। सभ्यता से ज्यादा पुराना है असभ्यता का इतिहास परन्तु उसका अवचेतन के कोने में अमर होना समझ नहीं आता। कार्यक्रम में लगे ठहाके और बजी तालियां मनुष्य अवचेतन की कन्दरा के कोने में मौजूद आदिम प्रवृतियों और हिंसात्मक अश्लीलता की सार्वजनिक अभिव्यक्ति है गोयाकि हजारों वर्ष पुरानी कुंठाओं की अनुगूंज थी वे तालियां और ठहाके। एक तरह से बर्बरता मानसिक कुंठाओं ने अपने आज भी जीवित होने का प्रमाण दिया है। यह भीतरी बीहड़ सारी संस्कृति को ठेंगा दिखा गया। वह कार्यक्रम अश्लील फिल्मों से अलग है, उनमें तो कुछ कला भी हाेती है परन्तु यह अश्लीलता जंगलीपन की होली की तरह प्रस्तुत हुआ।

गुड़ खाकर गुलगुले से परहेज नहीं किया जाता। टेक्नोलॉजी मशीनों के साथ एक जीवन शैली भी आती है। करण भारत से अधिक समय अमेरिका में रहते हैं, अत: 'रोस्ट' उनकी पसंद और उसका भारतीय संस्करण उन्होंने प्रस्तुत किया- इसी तरह की खबरें रही हैं अौर आमिर का सरेआम उन्हें फटकारना इसकी पुष्टि करता है। लगता है कि मंच पर प्रस्तुत हरकतें कुछ ऐसी थीं मानो अवचेतन में छुपे सांपों को मंच पर रेंगने के लिए छड़ दिया है और 'साहसी दर्शकों' की तालियों की बीन पर सांप नृत्य कर रहे थे।

अमेरिका के आम आदमी पारिवारिकता की भावना से बंधे साधारण गृहस्थ होते हैं और 'रोस्ट' नहीं देखते। अमेरिका हथियारों की तरह कुछ अभद्रता अश्लीलता निर्यात के लिए बनाता है। उनके विकास के मॉडल को भी हमारी सरकार ने स्वीकार किया है। अब करण अमेरिका का आणविक ऊर्जा का संयंत्र तो नहीं आयात कर सकते क्योंकि उसके विकिरण से हुई हानि की जवाबदारी अमेरिका नहीं लेता, अत: उन्होंने 'रोस्ट' आयात किया जिसके सांस्कारिक विकिरण के खिलाफ उनके पास अपने नाम दाम का कवच है। इस पूरे प्रकरण में सबसे खतरनाक बात यह है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पावन मुद्दा कलंकित हो गया।