लघुकथा / अनिता ललित / कविता भट्ट

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ख़ास आप सबके लिए!

गर्म-गर्म गुजिया एक सुंदर प्लेट में सजी हुई मेज़ पर रखी हुई थीं। वह अपने मोबाइल से भिन्न-भिन्न एंगल से उस गुजिया से सजी प्लेट का फ़ोटो खींच रही थी-मगर उसके मन का फ़ोटो नहीं आ रहा था। वह बहुत जल्दी में लग रही थी और इसलिए खीझ भी रही थी। मेज़ के दूसरे कोने में उसका लैपटॉप रखा हुआ था, जिसमें वह बीच-बीच में झाँक कर आती थी और उसकी बेचैनी और भी बढ़ जाती थी। मानों वह किसी ‘रेस’ में भाग ले रही हो। इतने में उसका बेटा चिंटू, खेलकर आया और इतनी सुंदर गुजिया देखकर उससे रहा न गया और “अहा! गुजिया! मम्मा ! बहुत ज़ोरों की भूख लगी है!” कहकर प्लेट पर झपट पड़ा।

‘‘चटाक् ”… की आवाज़ के साथ एक और आवाज़ गूँजी…

दो मिनट का सब्र नहीं है! कोई मैनर्स नाम की चीज़ भी सीखी है? भुक्क्ड़ की तरह टूट पड़े बस!”

फिर सन्नाटा छा गया। चिंटू प्लेट तक पहुँच भी न पाया। उसे अपना क़सूर भी न समझ आया। बस अपना गाल सहलाता हुआ, सहम कर ठिठक गया।

वह बड़बड़ाती हुई फिर से गुजिया की प्लेट की फ़ोटो लेने लगी।

इतने में एक संकोचभरी आवाज़ आई, ‘‘बहू ! अगर तुम खाली हो गई हो तो गुजिया ले आना, भगवान को भोग लगा दें?”

“आती हूँ!… सबको अपनी ही पड़ी है! हुँह !” कहती हुई वह लैपटॉप पर बैठकर कुछ करने लगी। थोड़ी ही देर में उस ‘गुजिया की प्लेट’ की फ़ोटो फ़ेसबुक पर लगी हुई थी , और उसका शीर्षक था- ‘ख़ास आप सबके लिए!’

उसपर ढेरों ‘लाइक्स’ और ‘वाह! वाह! गृहिणी हो तो आप जैसी !’ – कमेंट्स आने लगे और वह गर्व से फूली नहीं समाई!

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बिसेस आपा वास्ता

गरम-गरम गुजिया एक सुंदर प्लेट म सजै क मेज़ माँ धारीं छैं । वा अपड़ा मुबैल न अलग - अलग एंगल बिटिक वीं गुजियन सजीं प्लेट कि फ़ोटू खैंचणी छै , पर वीं का मनौ कु फ़ोटू नि छौ आणु। वा भौत जल्दी म छै लगणी अर याँ इ लै खिझेणी छै। मेज़ क दूसरा कोणा पर वीं कु लैपटॉप रख्यूँ छौ, जै माँ वा बीच-बीच म झळ - झ देखिक क आणि छै अर वीं की बेचैनी हौर बि बढणी छै। माना वा कै ”दौड़” म भाग लेणि हो। इतगा म वीं कु नौनु चिंटू, खेलिक आई अर इतगा बडिया गुजिया देखिक वे सि रये नी गे अर ”अहा! गुजिया! माँ ! भौत ज़ोर कि भूख लगीं च!” बोलिक प्लेट पर हथ मारि।

”चटाक् ”… की आवाज़ आई अर एक हौर आवाज़ गूँजी…

”द्वी मिनटौ कु सब्र नि च ! क्वी मैनर्स नौं की चीज़ छ कि नि सीखी? भुक्क्ड़ की तरौं झपटणू छै बस!”

फिर सन्नाटू ह्वेगे। चिंटू प्लेट तक पौंछि बि नी सकि। वे थैं अपडु क़सूर भी न समझ नि आई। बस अपडु गलोडु मलासिक, डरिक रुकि गे।

वा बड़बड़ करिक दुबरा गुजिया कि प्लेट की फ़ोटो लेण लगी गे।

इतगा म एक झिज्कीं सि धै आई,”ब्वारी! अगर तुम खाली छां त गुजिया लेकि आन, भगवान जि थैं भोग लगै द्योला?”

“आणू छौं!… सब्बु थैं अपड़ी इ पोड़ी च! हुँह !”

बोलि क वा लैपटॉप पर बैठिक कुछ कन्न लगी गे। थोड़ी देर म वीं ”गुजिया की प्लेट” की फ़ोटू फ़ेसबुक म लगीं छै , अर वाँकु शीर्षक छौ- 'बिसेस आप सब्बु का वास्ता!'

वां पर भौत सारा 'लाइक्स' अर ”वाह! वाह! गृहिणी ह्वा त आप जनि !” – कमेंट्स आण लगी गे छा अर वा अफ्फु पर गर्व करिक खुस हूणी छै!

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